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मैं तीरथ यात्रा जा रहा हूँ

संता: मैं तीरथ यात्रा जा रहा हूँ। सोच रहा हूँ, दारु छोड़ दूँ।
बंता: ये तो अच्छी बात है, इसमें कठिनाई क्या है?
संता: पर किसके पास छोडूं? मेरे सभी दोस्त कमीने है साले, पी जायंगे।

संता का रोमांस!

एक बार संता अपनी प्रेमिका के साथ पार्क में बाहों में बाहें डाल कर बैठा हुआ था और कुछ बड़ी ही रूमानी बातें कर रहा था कि तभी अचानक वहां एक हवलदार आया और संता से बोला, ” आपको शर्म नहीं आती आप एक समझदार व्यक्ति होकर खुलेआम पार्क में ऐसी हरकत कर रहे हैं”।

संता: देखिये हवालदार साहब आप गलत समझ रहे हैं, जैसा आप सोच रहे हैं वैसा कुछ भी नहीं है।

हवलदार: तो कैसा है?

संता: जी हम दोनों शादीशुदा हैं।

हवालदार: अगर तुम शादीशुदा हो तो फिर अपनी ये प्यार भरी गुटरगूं अपने घर पर क्यों नहीं करते।

संता: हवालदार साहब कर तो लें पर वहां मेरी पत्नी और और इसके पति को शायद अच्छा नहीं लगेगा।

तुझे अंडा बना दूँ

संता-बंता के घर पर नाश्ता करने के लिए गया हुआ था।
बंता: तुझे अंडा बना दूँ?
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संता: नहीं मैं ‘इंसान’ ही ठीक हूँ।